हमे तो तुम्हारी याद नहिँ आति।

 हमे तो तुम्हारी याद नहिँ आति।

हा हा पता है तुम्हारे गलेका ओ तिल

क्या करे अब तो चाँदका दाग देख्ते भि 

तुम्हारे तिल पे दिल नहिँ आति 


सुना है बहुत बिमार पड्ती हो इन दिनो

क्या करे हमको त भग्वान पुज्ते हुए भि 

उस्कि मुरत पर तुम्हारी सुरत नहिँ आति 


साबास् तुम तो बढी जल्दी,भुल गयि हमे 

क्या करे हमे तो तुम्हारी तस्बिर 

देख्ते हुए भि तुम्हारी याद नहिँ आति 


मेहेरबानी आपकी,आज खुद चली आइ सपनोमे

क्या करे रोज तुम्हारी आवाज आति, आहाट आति 

 कभी भि नहि देखा तुमे, बला तुम क्यु नहिँ आति?


ख्याल हि तो है महोतर्मा

लगता है, कास 

तुम मेरि जिन्दगिमे कभी ना आति 


बहुत बढिया एक  तर्फा 

बहुत सिद्दत से जि लेङे 

तुम्हेतो बहुत हिच्किया आति होगि 

क्या करे उन हिच्कियोकी पिछेका यादमे भि 

हमे तो तुम्हारी याद नहिँ आति।।

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